Wednesday, 4 February, 2009

मेरे लिए बच्चा पैदा कर दो, प्लीज

सुना आपने

बिल्कुल सच्ची बात है...सुनीता मां बन गई है...सुनीता फिर से मां बन गई है...सुनीता का सुनीता होना अहम नहीं है...कोई भी हो सकती है...लड़कियां भले ही कम हों, मां बनने वाली लड़कियों की हमारे यहां कोई कमी नहीं है...वैसे जिस दर से हमारे यहां बच्चे पैदा होते हैं, सुनीता का सुनीता होना और मां बनना दोनों ही अतिसामान्य घटनाएं होतीं...अगर यह बच्चा खास न होता...इसीलिए सोचा आपको भी बता दूं...सुनीता दोबारा मां बन गई है...अभी-अभी फोन आया...मैं हैरान था...क्यों? उनका तो एक बेटा है...7-8 साल का...इतने साल बाद अचानक...हां, जरूरी था...जरूरी, क्यों...ये बच्चा उसने अपने लिए पैदा नहीं किया है...यानी??...यानी सुनीता ने यह बच्चा अपनी ननद के लिए पैदा किया है...ननद के लिए...मेरी हैरत के घोड़ों की लगाम खुल चुकी थी...हां, उसकी ननद मां नहीं बन सकती...इसलिए उसने ही इल्तिजा की थी कि मेरे लिए एक बच्चा पैदा कर दो...ऐसा भी होता है????...अरे तुम तो ऐसे हैरान हो रहे हो, जैसे यह पहली बार हुआ है...नहीं पहली बार तो नहीं, लेकिन आपको पता है किराए की कोख के लिए कितनी बहस चल रही है देश-दुनिया में...तुम्हारे देश और दुनिया वाले करते होंगे ऐसी बातों पर बहस...यहां गांव में ऐसा कुछ नहीं होता...तो क्या ननद ने कहा और सुनीता मान गई?...हां, ऐसे ही होता है...वो जो रामफल है ना...कौन वो जिसका भाई मेरे साथ पढ़ता था...हां वही...रामफल का बेटा उसकी बहन ने दिया है उसे पैदा करके...और वो जो जगबीर है ना...

लो जी...दसियों कहानियां हैं ऐसी मेरे आस-पास ही...हैरत के घोड़े काफी दूर निकल गए थे...मुझे लगा अब उन्हें वापस बुला लूं...लेकिन नहीं, अभी तो हैरत का सफर बाकी था...तो सुनीता कब दे देगी उस बच्चे को अपनी ननद को...नहीं देगी...यानी बच्चा ननद को नहीं देगी?...ना...क्यों...उसकी ननद ने मना कर दिया...क्यों मना कर दिया? उसी के कहने पर तो पैदा किया...अरे ये तो पहले ही तय था...क्या...उसकी ननद ने पहले ही कहा था...लड़का हुआ तभी लूंगी...लड़की हुई है...

मैंने हैरत के सारे घोड़ों को मन के अस्तबल में बंद कर दिया है...

3 comments:

विवेक सिंह said...

हमें तो हैरत हो रही है जी !

Anonymous said...

bhut acha likha hai ? kya ye sach ghatna hai ?

Anonymous said...

bhut acha likha hai ? kya ye sach ghatna hai ?