जसवंत सिंह किताब से गुजरात में पाबंदी हटा दी गई है। कोर्ट की दखलअंदाजी से ही यह संभव हुआ। नहीं तो फासीवादियों से तो यह उम्मीद नहीं की जा सकती थी। फिर भी, बधाई। उन सभी को, जो लोकशाही में भरोसा रखते हैं। आजादी में भरोसा रखते हैं। लेकिन फासीवाद का विरोध जारी रहे। जिन्ना के नाम पर हो रही खोखली राजनीति का विरोध जारी रहे। किताब के नाम पर हो रहे प्रोपेगैंडा का विरोध जारी रहे।
3 comments:
ठीक है जी हर चीज का विरोध जारी रखेंगे. फासीवादी भी कमाल के है. भाजपा बैन करती है और कॉंग्रेस उसका स्वागत करती है! किसे फासीवादी कहोगे?
आज के महौल मे कुछ भी नही कहा जा सकता ........आगे देखिये उंट किस करवट बैठता है ....
आज के महौल मे कुछ भी नही कहा जा सकता ........आगे देखिये उंट किस करवट बैठता है ....
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