सूनी अंधेरी गली में
रात को भौंकते कुत्ते
क्या आपकी नींद खराब करते हैं?
नींद उचट जाने के बावजूद
आपको लगता होगा
सूनी अंधेरी गली में
रात को भौंकते कुत्ते
प्रतीक हैं उस अनजान साये का
जो उन्हें अंधेरे में नजर आ रहा है।
तब नींद की जगह
आंखों में
उमड़ पड़ता होगा धन्यवाद
कोई आपको बचा रहा है।
जरूरी नहीं कि
अनजाना साया,
आया ही हो
हो सकता है
कुत्तों को भौंकने में
मजा आने लगा हो।
आप ये क्यों नहीं सोचते
कि
सूनी अंधेरी गली में
रात को भौंकते कुत्ते
प्रतीक हैं
आपके जग जाने का।
तो बैठें
उठें
देखें
साया है भी या नहीं।
क्योंकि
भौंकना उनका फर्ज़ ही रहे
शौक न हो जाए।
ज़रूरी आपकी नींद रहे
उनकी भौंक न हो जाए।
हजारे जीतें या हारें - चुनौतियां बड़ी हैं
6 months ago


7 comments:
"भौंकना उनका फर्ज़ ही रहे
शौक न हो जाए।"
और अगर शौक बन जायेगा तो --
हम कह तो सकेंगे कि कोई तो है जो अपने फर्ज को शौक से निभा रहा है.
बहुत खूबसूरत रचना रची है आपने.
इशारों इशारों में आप बहुत कुछ कह गए विवेक जी। वाह।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com
अच्छी कविता
gahare bhaaw wali rachana......badhaaee
बात में दम है। यह सतर्कता जरुरी है कि कुत्तों को केवल भौंकने के लिए नहीं भौंकने दिया जाए। यह उनका शौक न हो जाए। कविता असली बात अपनी आखिरी पंक्तितों में ही कहती है। बढ़िया स्टाइल।
वाह क्या व्यंग्य किया है...
विवेकजी आपका व्यंग पूर्ण शैली में बात कहना पसंद आया बधाई
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