Tuesday 18 August 2009

सिस्टमः भौंकना कुत्तों का फर्ज रहे

सूनी अंधेरी गली में
रात को भौंकते कुत्ते
क्या आपकी नींद खराब करते हैं?
नींद उचट जाने के बावजूद
आपको लगता होगा
सूनी अंधेरी गली में
रात को भौंकते कुत्ते
प्रतीक हैं उस अनजान साये का
जो उन्हें अंधेरे में नजर आ रहा है।
तब नींद की जगह
आंखों में
उमड़ पड़ता होगा धन्यवाद
कोई आपको बचा रहा है।
जरूरी नहीं कि
अनजाना साया,
आया ही हो
हो सकता है
कुत्तों को भौंकने में
मजा आने लगा हो।
आप ये क्यों नहीं सोचते
कि
सूनी अंधेरी गली में
रात को भौंकते कुत्ते
प्रतीक हैं
आपके जग जाने का।
तो बैठें
उठें
देखें
साया है भी या नहीं।
क्योंकि
भौंकना उनका फर्ज़ ही रहे
शौक न हो जाए।
ज़रूरी आपकी नींद रहे
उनकी भौंक न हो जाए।

7 comments:

M VERMA said...

"भौंकना उनका फर्ज़ ही रहे
शौक न हो जाए।"
और अगर शौक बन जायेगा तो --
हम कह तो सकेंगे कि कोई तो है जो अपने फर्ज को शौक से निभा रहा है.
बहुत खूबसूरत रचना रची है आपने.

श्यामल सुमन said...

इशारों इशारों में आप बहुत कुछ कह गए विवेक जी। वाह।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

Arvind Mishra said...

अच्छी कविता

ओम आर्य said...

gahare bhaaw wali rachana......badhaaee

Pooja Prasad said...

बात में दम है। यह सतर्कता जरुरी है कि कुत्तों को केवल भौंकने के लिए नहीं भौंकने दिया जाए। यह उनका शौक न हो जाए। कविता असली बात अपनी आखिरी पंक्तितों में ही कहती है। बढ़िया स्टाइल।

vikas vashisth said...

वाह क्या व्यंग्य किया है...

karuna said...

विवेकजी आपका व्यंग पूर्ण शैली में बात कहना पसंद आया बधाई