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Thursday, 1 January 2009

कॉमेंट्स तो सब रवीश के यहां चले जाते हैं

सुना आपने

साल के पहले ही दिन मेरा झगड़ा हो गया
मेरे भीतर बैठा ब्लॉगर अड़कर खड़ा हो गया
बोला, क्यों लिखा जाए हर बवाल पर
जाओ मैं नहीं लिखता नए साल पर
मैं हैरान परेशान उसे मनाने लगा
नए साल पर लिखने के फायदे बताने लगा
भाई, आज तो अग्रीगेटर्स पर दिखना होगा
नए साल पर जरूर लिखना होगा
मूर्ख देख...लिखा है इसी पर सबने
बवाल और ब्लॉगरों की तो
जोड़ी बना दी रब ने
कुछ भी हो जाए टूट पड़ना है
हिट्स आएं न आएं
पोस्ट के मामले में नहीं पिछड़ना है

और कॉमेंट्स? उसने आंखें तरेरी
सच कहूं, जबान बंद हो गई मेरी
हम लिखते रहते हैं और हाथ मले जाते हैं
कॉमेंट्स सारे रवीश के यहां चले जाते हैं
गली-मोहल्ले तुम्हें पूछते हैं नहीं
अपने अलावा छपते हो तुम कहीं?
नारी संवेदना के लिए लोग बेटियों के ब्लॉग पढ़ते हैं
और कविता प्रेमियों को गौरव सोलंकी ले उड़ते हैं
हंसी-मजाक में ताऊ जैसे कई उस्ताद हैं
और विचार में तो बड़े-बड़े जिंदाबाद हैं
तुम तो फालतू के उसूली हो
ये पढ़े-लिखों की दुनिया है
तुम किस खेत की मूली हो

मैंने कहा यूं नाम मत ले कम्बख्त, मरवाएगा
तू तो ये ब्लॉग ही बंद करवाएगा
ब्लॉगिंग की दुनिया बहुत खास है
यहां बराबरी का आभास है
जो लिखता है, वो दिखता है
लेकिन सिर्फ अच्छा माल बिकता है
अच्छा लिख, तुझे भी टिप्पणी मिलेगी
लेकिन, चुप रहने से दुकान नहीं चलेगी
अपने भीतर से कुछ अच्छा सा निकाल
नए साल पर सबसे अलग कुछ लिख डाल
एक जनवरी है, नए साल पर सब पढ़ेंगे
दिखेंगे तो हम भी नजरों में चढ़ेंगे

बैठा तो अभी नहीं है, थोड़ा ढीला हो गया है
दिखने के लालच में लाल से पीला हो गया है
जब तक मैं इसे मनाऊं
और हम मिलकर कुछ अच्छा लिख लाएं
आपको ‘सुना आपने’ की ओर से
नए साल की शुभकामनाएं