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Saturday, 24 January 2009

चलती बस में खड़ी लड़कियां

(सुना आपने...आज बालिका दिवस है...क्यों है?)

दिल्ली की चलती बस में खड़ी लड़कियां
बहुत इंटेलिजेंट होती हैं
वे अच्छी तरह समझती हैं
चेहरों की जबान,
आंखों के इशारों को ट्रांसलेट करना
उनके बाएं हाथ का खेल है,
माल, पटाखा और बम जैसे शब्दों के अर्थ
उन्हें अच्छी तरह मालूम हैं,
वे उन शब्दों के अर्थ भी जानती हैं
जो वे कभी नहीं बोलतीं।
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते जैसी बातों को
वे बकवास कहती हैं,
बस के अचानक ब्रेक लगने का दर्द
वे सीटों पर बैठे उन लोगों से भी बेहतर जानती हैं
जिनके सिर सामने की रॉड से टकराते हैं।

दिल्ली की चलती बस में खड़ी लड़कियां
मूर्ख नहीं होतीं
चुप होती हैं।
वे जानती हैं
बोलना कभी-कभी काफी महंगा पड़ जाता है,
वे जानती हैं कि इधर-उधर फिसलते हाथों में
तेजाब भी हो सकता है।
वे जानती हैं
3 रुपये की टिकट की असली कीमत,
वे जानती हैं
बस में सफर करते हर आदमी की औकात,
इसलिए
वे बस से उतरते ही खिलखिला देती हैं।

दिल्ली की चलती बस में खड़े
लड़के कैसे होते हैं?